15 June 2026 कोरबा: मानिकपुर परियोजना क्षेत्र के भू-विस्थापितों, श्रमिकों एवं ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर सोमवार को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और जिला प्रशासन को 8 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

घंटाघर स्थित ओपन थिएटर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि मानिकपुर परियोजना के अंतर्गत आने वाले ग्राम भिलाई खुर्द, रापाखर्रा एवं आसपास के क्षेत्रों के लोग प्रदूषण, रोजगार, पुनर्वास और श्रमिक शोषण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत और मांग उठाए जाने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण प्रभावितों में भारी नाराजगी है।

सभा के बाद हजारों की संख्या में ग्रामीणों, भू-विस्थापितों और श्रमिकों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रशासन और SECL प्रबंधन का ध्यान समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मानिकपुर ओसीएम के परित्यक्त क्षेत्रों में की जा रही राखड़ डंपिंग को तत्काल बंद कराने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि राखड़ डंपिंग से आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा हसदेव नदी के प्रदूषित होने का खतरा भी उत्पन्न हो गया है।

इसके अलावा भिलाई खुर्द और रापाखर्रा के भू-विस्थापित परिवारों को मानिकपुर माइंस की वर्तमान एवं भविष्य की सभी ठेका कंपनियों में रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में कहा गया है कि जिन परिवारों ने अपनी जमीन खोई है, उन्हें रोजगार के अवसरों में प्राथमिक अधिकार मिलना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने ठेका मजदूरों को नियमानुसार HPC रेट के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने, नकद वेतन भुगतान की जांच कराने तथा सभी मजदूरों का वेतन बैंक खातों के माध्यम से देने की मांग भी की। साथ ही श्रमिक शोषण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और वैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में मानिकपुर परियोजना क्षेत्र में भविष्य में कार्यरत होने वाली सभी ठेका कंपनियों में स्थानीय भू-विस्थापित युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की नीति लागू करने की मांग भी शामिल है। इसके साथ ही वायु एवं पर्यावरण प्रदूषण की स्वतंत्र जांच कर नियमित पानी छिड़काव, हरित पट्टी विकास और अन्य नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई।
प्रभावित ग्रामीणों ने CSR और DMF निधि के माध्यम से भिलाई खुर्द, रापाखर्रा एवं अन्य प्रभावित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, महिला स्वरोजगार, कौशल विकास, खेल मैदान और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास की भी मांग उठाई।
इस अवसर पर जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यह आंदोलन प्रभावित परिवारों के अधिकार, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
