30 June 2026 कोरबा: पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने वेदांता-बालको द्वारा पिछले 10 वर्षों में सरकार के खजाने में 5 लाख करोड़ रुपये के योगदान संबंधी प्रचार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि करों का भुगतान किसी कंपनी का उपकार नहीं, बल्कि उसकी कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आयकर, जीएसटी, रॉयल्टी, सीमा शुल्क एवं अन्य कर कानून के तहत देय राशि हैं, जिन्हें सामाजिक योगदान बताकर प्रचारित करना जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि वास्तविक प्रश्न यह है कि कोरबा की प्राकृतिक संपदा का उपयोग कर हजारों करोड़ रुपये का लाभ कमाने वाली कंपनी ने जिले और यहां की जनता के विकास के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि कोरबा आज भी प्रदूषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, स्थानीय युवाओं के रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाओं और आधारभूत विकास जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
उन्होंने वेदांता-बालको पर हॉकी खेल के विकास के लिए कोरबा में राष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान बनाने और हॉकी को गोद लेने के सार्वजनिक वादे को अब तक पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इसके कारण जिले के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि आईटी कॉलेज की स्थापना के समय कंपनी ने कॉलेज के विकास एवं संचालन के लिए आर्थिक सहयोग देने का आश्वासन दिया था, लेकिन पर्याप्त सहयोग उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे कॉलेज का संचालन प्रभावित हो रहा है और संस्था बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यदि कंपनी वास्तव में अपने सामाजिक उत्तरदायित्व और उपलब्धियों पर गर्व करती है, तो उसे कोरबा की जनता के सामने एक सार्वजनिक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। इसमें पिछले 10 वर्षों में कोरबा से अर्जित लाभ, जिले के विकास पर किया गया निवेश, स्थानीय युवाओं को दिए गए स्थायी रोजगार, प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्य, सीएसआर मद की राशि का उपयोग, हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान के अधूरे वादे तथा आईटी कॉलेज को आर्थिक सहयोग नहीं देने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी उद्योग की समृद्धि जिस क्षेत्र के संसाधनों से होती है, उस क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाना उसकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। कोरबा की जनता को चमकदार विज्ञापनों की नहीं, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक खेल सुविधाओं, स्थानीय युवाओं के रोजगार और समग्र विकास की आवश्यकता है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि अब जनता विज्ञापनों से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों के आधार पर कंपनियों का मूल्यांकन करेगी। उन्होंने कहा कि कोरबा की जनता का स्पष्ट संदेश है— “प्रचार नहीं, विकास का हिसाब दीजिए; वादे नहीं, उन्हें पूरा करके दिखाइए।”
