महिला आरक्षण पर जयसिंह अग्रवाल का बड़ा बयान: ‘यह कानून नहीं, राजनीति का खेल

20 April 2026 कोरबा: महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके अधूरे और भ्रामक स्वरूप का विरोध कर रही है।

अग्रवाल ने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं के साथ छल किया जा रहा है। उनके अनुसार यह विधेयक अधूरा और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है, जिसे जल्दबाजी में लाकर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई है।

प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि इस विधेयक में OBC और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण का प्रावधान नहीं है, जिससे सामाजिक न्याय प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कानून को जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जोड़ दिया गया है, जिससे इसका लागू होना वर्षों तक टल सकता है।

अग्रवाल ने यह भी आरोप लगाया कि विधेयक में तत्काल लागू करने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है, जिससे सरकार की मंशा पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के बजाय यह कदम राजनीतिक छवि सुधारने और वोट बैंक साधने का प्रयास अधिक लगता है।

उन्होंने संभावित प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि यह विधेयक इसी स्वरूप में लागू होता है तो सामाजिक असंतुलन बढ़ेगा और वंचित वर्ग की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा। साथ ही यह कानून लंबे समय तक केवल कागजों में ही सीमित रह सकता है, जिससे लोकतंत्र में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।

अग्रवाल ने कांग्रेस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी सिद्धांत रूप में महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन यह आरक्षण न्यायपूर्ण और समावेशी होना चाहिए। इसके लिए OBC महिलाओं के लिए अलग प्रावधान और कानून को लागू करने की स्पष्ट व त्वरित समयसीमा तय करना जरूरी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून 2023 में पारित हुआ, तो इसे 2024 से लागू करने में क्या बाधा थी। इसे परिसीमन से जोड़कर टालना इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता तत्काल क्रियान्वयन नहीं है।

अंत में उन्होंने कहा—
“हमारी मांग स्पष्ट है—महिला आरक्षण ऐसा हो जो न्यायपूर्ण, समावेशी और तुरंत लागू होने वाला हो। अधूरा कानून लाकर केवल राजनीति करना देश और महिलाओं—दोनों के साथ न्याय नहीं है।”

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि विधेयक में आवश्यक संशोधन कर इसे वास्तव में प्रभावी और सर्वसमावेशी बनाया जाए, ताकि सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिल सके।

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