मानिकपुर ओसीएम में फ्लाई ऐश प्रबंधन पर उठे सवाल, जयसिंह अग्रवाल ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट माइंस (ओसीएम) क्षेत्र में फ्लाई ऐश के कथित अनियंत्रित संचयन, बढ़ते धूल प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने केंद्रीय कोयला मंत्री से स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है।

श्री अग्रवाल ने केंद्रीय कोयला मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि कोयला मंत्रालय को एसईसीएल प्रबंधन द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन का परीक्षण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न समस्याओं का समुचित एवं तथ्यात्मक उल्लेख नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि मूल शिकायत का मुख्य विषय यह था कि मानिकपुर क्षेत्र में फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग करने के बजाय बड़े-बड़े खुले ढेरों के रूप में संचयन किया गया है। इसके चलते तेज हवाओं और गर्मी के दौरान सूक्ष्म धूल कण पूरे क्षेत्र में फैल रहे हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों, श्रमिकों एवं आसपास के निवासियों को वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के प्रतिवेदन पर सवाल उठाते हुए कहा कि फ्लाई ऐश प्रबंधन को लेकर कई तकनीकी दावे किए गए हैं, लेकिन इनके समर्थन में स्वतंत्र पर्यावरणीय परीक्षण रिपोर्ट, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग रिपोर्ट, पीएम-10 एवं पीएम-2.5 के आंकड़े, थर्ड पार्टी पर्यावरणीय ऑडिट रिपोर्ट या स्वास्थ्य प्रभावों से संबंधित कोई अध्ययन प्रस्तुत नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी पूछा कि यदि फ्लाई ऐश भराव कार्य पूरी तरह वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से किया जा रहा है, तो फिर लगातार फॉगिंग कैनन, वाटर स्प्रिंकलर, पानी के टैंकर और अन्य धूल नियंत्रण उपायों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

अग्रवाल ने कहा कि एसईसीएल ने अपने प्रतिवेदन में 5 नवंबर 2025 से फ्लाई ऐश भराव कार्य अस्थायी रूप से बंद होने का दावा किया है, जबकि स्थानीय परिस्थितियां और उपलब्ध दृश्य साक्ष्य इसके विपरीत संकेत देते हैं। उन्होंने 9 जून 2026 को मानिकपुर ओसीएम क्षेत्र से प्राप्त फोटो और वीडियो का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष स्थल निरीक्षण की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि एसईसीएल द्वारा लगभग 27 मिलियन क्यूबिक मीटर फ्लाई ऐश के उपयोग का उल्लेख किया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश के उपयोग और निपटान के मामले को केवल विभागीय प्रतिवेदन के आधार पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसका दीर्घकालिक प्रभाव पर्यावरण, भू-जल, वायु गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि मूल शिकायत में सड़क दुर्घटनाओं, धूल प्रदूषण, श्वसन संबंधी समस्याओं और स्थानीय जनजीवन पर पड़ रहे प्रभावों का उल्लेख किया गया था, लेकिन एसईसीएल द्वारा न तो कोई स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और न ही कोई स्वतंत्र पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।

जयसिंह अग्रवाल की प्रमुख मांगें

  • मानिकपुर ओसीएम में फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं वर्तमान स्थिति की जांच के लिए स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए।
  • समिति में पर्यावरण विशेषज्ञ, प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञ, स्वतंत्र तकनीकी संस्थानों तथा स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
  • समिति द्वारा स्थल का भौतिक निरीक्षण कर फ्लाई ऐश संचयन, धूल प्रदूषण एवं नियंत्रण उपायों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाए।
  • वायु गुणवत्ता, भू-जल, धूल प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।
  • एसईसीएल के दावों और वास्तविक परिस्थितियों में अंतर पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यह केवल एक खनन परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि हजारों स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा जनहित का विषय है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर प्रभावित क्षेत्रों और फ्लाई ऐश संचयन स्थलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कराने में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।

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