कोरबा में ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के तहत कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, कलेक्टर कार्यालय घेराव के दौरान पुलिस से आमना-सामना

24 Feb 2026 कोरब: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में किए गए बदलावों के विरोध में ‘मनरेगा बचाओ अभियान संग्राम’ के तहत कोरबा में कांग्रेस द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया। शहर के कोसाबाड़ी चौक में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता एकत्रित हुए, जहां सभा आयोजित कर केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा गया। सभा के बाद नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर रैली निकाली गई।

जैसे ही रैली कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ी, प्रशासन ने पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर बेरिकेडिंग कर दी थी। प्रदर्शनकारियों ने पहला बेरिकेड हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही दूरी पर दूसरे बेरिकेड पर उन्हें रोक लिया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर ‘वीबीजी राम जी’ (विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण) किया गया है, जो मूल कानून की भावना के साथ छेड़छाड़ है। इसी के विरोध में देशव्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है, जिसके तहत कोरबा जिला शहर एवं ग्रामीण कांग्रेस कमेटी द्वारा यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को समाप्त कर श्रमिकों से काम का अधिकार छीनने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से मिलने वाले जीवन के अधिकार पर आधारित थी, लेकिन अब इसे केंद्र द्वारा नियंत्रित योजना में परिवर्तित कर दिया गया है, जो श्रमिक विरोधी कदम है।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि सुधार के नाम पर भाजपा सरकार ने लोकसभा में एक और विधेयक पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को समाप्त करने का काम किया है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी की सोच और गरीब मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताया। उनका कहना था कि नया फ्रेमवर्क मनरेगा को एक सशर्त और केंद्र नियंत्रित योजना में बदल देता है, जिससे रोजगार की गारंटी समाप्त हो जाएगी।

कोरबा प्रभारी विजय केशरवानी ने कहा कि मनरेगा कानून मजदूरों को काम का वैधानिक अधिकार देता था और बीते दो दशकों से 12 करोड़ से अधिक श्रमिकों के लिए यह योजना जीवनरेखा साबित हुई है। कोविड महामारी के समय भी इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान किया था।

विधायक फूलसिंह राठिया ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब वर्ग के लिए रोजगार का मजबूत सहारा रही है, लेकिन अब नाम और नियम दोनों में बदलाव कर इसे केंद्र की मर्जी पर निर्भर बना दिया गया है। पूर्व विधायक मोहित केरकेट्टा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने भगवान राम के नाम का राजनीतिक उपयोग किया है, जबकि ‘वीबीजी राम जी’ का पूरा नाम विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण है, जिसका भगवान राम से कोई संबंध नहीं है।

पूर्व विधायक पुरूषोत्तम कंवर ने कहा कि वर्ष 2005 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून ग्रामीणों को मजदूरी का वैधानिक अधिकार देता था, जिसे अब कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

सभा को पूर्व विधायक श्यामलाल कंवर, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, पूर्व सभापति श्यामसुंदर सोनी, कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल, पूर्व जिला अध्यक्ष नत्थुलाल यादव, सपना चौहान, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, अशोक देवांगन, धुरपाल सिंह कंवर, राजेंद्र सिंह ठाकुर, कृपाराम साहू, शोभना देवांगन, प्रदीप अग्रवाल सहित अनेक पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम का संचालन जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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