25 March 2026 कोरबा: नगर निगम कोरबा द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का लगभग 915 करोड़ रुपये का बजट पूरी तरह से भ्रामक, जनविरोधी और केवल कागजी घोषणाओं का पुलिंदा है। यह बजट शहर की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़कर केवल आत्मप्रशंसा और झूठे प्रचार का दस्तावेज बनकर रह गया है।
पूर्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल ने कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट “विकास” नहीं बल्कि “विनाश और भ्रम” का ब्लूप्रिंट है। पिछले वर्षों के बजट की तरह इस बार भी वही पुराने वादों को दोहराकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है, जबकि हकीकत यह है कि पिछले एक साल में एक भी बड़ा वादा जमीन पर नजर नहीं आया।
उन्होंने कहा कि 67 वार्डों में आज भी पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं चरमरा चुकी हैं। लोग अंधेरे में जीने को मजबूर हैं, पानी के लिए भटक रहे हैं, लेकिन निगम का बजट इन जमीनी समस्याओं पर मौन है। यह सीधा-सीधा जनता के साथ विश्वासघात है।
श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन उन योजनाओं का भी श्रेय ले रहा है, जिनका नगर निगम से कोई लेना-देना नहीं है — जैसे धान खरीदी @3100 रुपये प्रति क्विंटल, महतारी वंदन योजना, रामलला दर्शन योजना। यह स्पष्ट रूप से जनता को भ्रमित करने और अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास है।
उन्होंने आगे कहा कि गरीबों के अंतिम संस्कार हेतु लकड़ी उपलब्ध कराने, छात्राओं को मुफ्त बस सेवा देने जैसे वादे पूरी तरह फेल साबित हुए हैं। यह दिखाता है कि निगम की प्राथमिकताएं जनहित नहीं बल्कि केवल घोषणा करना है।
बजट में शहर के वास्तविक विकास — जैसे गार्डन, सामुदायिक भवन, बाजार व्यवस्था, खेल मैदान, स्थानीय व्यापारिक सुविधाएं — पर कोई गंभीर योजना नहीं है। उल्टा, कांग्रेस शासनकाल में बने सार्वजनिक संसाधनों को निजी एजेंसियों को सौंपकर उनका व्यवसायीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता नहीं बल्कि ठेकेदारों और एजेंसियों को लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि हर काम आउटसोर्स एजेंसियों से ही कराना है, तो नगर निगम के पास मौजूद भारी भरकम संसाधन और कर्मचारी आखिर किस काम के हैं? यह सीधा-सीधा प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार की आशंका को जन्म देता है।
बुधवारी बाजार को भी निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की गई, जिससे छोटे सब्जी विक्रेताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ता। कांग्रेस के विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा — यह साबित करता है कि निगम की नीतियां गरीब और छोटे व्यापारियों के खिलाफ हैं।
श्री अग्रवाल ने बजट में बड़े-बड़े दावों जैसे एस.टी.पी. प्लांट, जल आपूर्ति योजनाएं, स्मार्ट सिटी जैसी बातों को “दिखावटी जुमले” बताते हुए कहा कि जब मौजूदा सिस्टम ही ठीक से काम नहीं कर रहा, तो नई योजनाएं केवल कागजों में ही सिमटकर रह जाएंगी।
अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट कोरबा की जनता के साथ एक क्रूर मजाक है। इसमें न विजन है, न ईमानदारी और न ही जवाबदेही। कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी बजट का हर स्तर पर विरोध करेगी और जनता के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ेगी।
