गैस की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, आम जनता पर बढ़ेगा बोझ – कांग्रेस

कोरबा। कमर्शियल एवं घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर जिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर और ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चौहान ने संयुक्त रूप से प्रेस नोट जारी कर कहा कि मोदी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन और कूटनीतिक विफलता के कारण देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।

शहर जिलाध्यक्ष मुकेश राठौर ने बताया कि केंद्र की मोदी (भाजपा) सरकार ने एक बार फिर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 195 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इससे पहले मार्च माह में भी कमर्शियल गैस के दाम में 114 रुपये की वृद्धि की गई थी, वहीं पिछले सप्ताह घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 62 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल, रेस्टोरेंट, चौपाटी, ठेला-गुमटी और नाश्ता-भोजन की दुकानों में खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ना तय है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और परिवार का आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष मनोज चौहान ने कहा कि खाद्य तेल, अनाज और दूध सहित दैनिक उपयोग की सभी वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे आम आदमी के किचन का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल के दाम 70 रुपये से बढ़कर लगभग 200 रुपये तक पहुंच गए हैं, वहीं घरेलू गैस सिलेंडर 350 रुपये से बढ़कर करीब 1000 रुपये तक और कमर्शियल गैस सिलेंडर 800 रुपये से बढ़कर लगभग 2000 रुपये तक पहुंचने की स्थिति में है। लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी का जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है।

ब्लॉक अध्यक्ष पालुराम साहू ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मनरेगा के माध्यम से रोजगार की कानूनी गारंटी दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने उसे केवल योजना तक सीमित कर दिया, जिससे गरीबों का रोजगार का अधिकार प्रभावित हुआ है और उनकी आय घटती जा रही है।

इस दौरान दर्री ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, बालको ब्लॉक अध्यक्ष ए.डी. जोशी, कुसमुंडा ब्लॉक अध्यक्ष बसंत चंद्रा, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू सहित मंडल अध्यक्ष मनीष शर्मा, सुकसागर निर्मलकर, जवाहर निर्मलकर, प्रदीप जायसवाल, देवीदयाल सोनी, बुद्धेश्वर चौहान, सुरती कुलदीप, अश्वनी पटेल, रोपा तिर्की एवं इकबाल कुरैशी ने भी कहा कि पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, अनाज, गैस, रेल टिकट, स्कूल-कॉलेज की फीस, बिजली बिल, पेयजल शुल्क, सफाई कर और संपत्ति कर जैसी दैनिक आवश्यकताओं की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि से आम जनता का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

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