मानिकपुर खदान विस्तार: ग्रामीणों के साथ अन्याय पर जयसिंह अग्रवाल की चेतावनी

14 April 2026 कोरबा: मानिकपुर खदान विस्तार: प्रभावित ग्रामीणों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं – जयसिंह अग्रवाल ने SECL प्रबंधन को दी कड़ी चेतावनी
कोरबा। मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों के मुद्दे पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए एस इ सी एल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) को पत्र लिखकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि प्रभावित परिवारों को न्यायोचित मुआवजा एवं रोजगार नहीं दिया गया, तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन की स्थिति निर्मित हो सकती है।

श्री अग्रवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि भिलाई खुर्द (क्रमांक 1, 2 एवं 3) सहित आसपास के ग्रामों के सैकड़ों परिवार मानिकपुर खदान विस्तार के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। पूर्व में लगभग 80 एकड़ भूमि अधिग्रहण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, किंतु आज तक उस पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ। अब पुनः लगभग 60 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से ग्रामीणों की आजीविका पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजा निर्धारण में भारी अनियमितताएं एवं असमानता बरती जा रही है। नव-निर्मित मकानों को पुराने ड्रोन सर्वे का हवाला देकर नजरअंदाज किया जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। साथ ही, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मामले में SECL प्रबंधन की उदासीनता भी स्पष्ट रूप से सामने आ रही है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक है और इससे क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

उन्होंने SECL प्रबंधन से मांग की है कि सभी प्रभावित परिवारों को उनकी भूमि एवं मकानों का वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार पारदर्शी और न्यायसंगत मुआवजा तत्काल दिया जाए, नव-निर्मित मकानों का पुनः सर्वे कराया जाए तथा प्रभावित ग्रामों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
साथ ही, उन्होंने कोरबा क्षेत्र के महाप्रबंधक को निर्देशित करने की भी मांग की है कि वे प्रभावित ग्रामीणों के साथ संवेदनशीलता के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।

श्री अग्रवाल ने दो टूक कहा कि यदि SECL प्रबंधन द्वारा शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके लिए उत्पन्न होने वाली जन-अशांति की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

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