वेदांता के BRSR पर बड़ा खुलासा: मानवाधिकार दमन और ESG धोखाधड़ी के आरोप, जयसिंह अग्रवाल ने SEBI से फॉरेंसिक जांच की मांग

30 Dec 2025 कोरबा: वेदांता लिमिटेड द्वारा अपने अनिवार्य Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) – वित्त वर्ष 2024–25 में मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार मामलों के दमन एवं भ्रामक ESG खुलासों के माध्यम से निवेशकों, नियामकों और सरकार को गुमराह किए जाने का एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। पूर्व राजस्व मंत्री, छत्तीसगढ़ जयसिंह अग्रवाल ने इस संबंध में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को औपचारिक शिकायत प्रस्तुत करते हुए फॉरेंसिक जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

BRSR में सुनियोजित झूठ और धोखाधड़ी

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वेदांता लिमिटेड ने SEBI (LODR) Regulations, 2015 के अंतर्गत अनिवार्य BRSR में जानबूझकर झूठे, भ्रामक और तथ्यहीन प्रकटीकरण किए हैं, जो सीधे तौर पर Material Misrepresentation की श्रेणी में आते हैं।

मुद्दा 1 : शिकायत निवारण तंत्र केवल कागज़ों में

वेदांता ने BRSR में यह दावा किया कि कर्मचारियों व श्रमिकों के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था मौजूद है और इसके लिए www.vedanta.ethicspoint.com पोर्टल सक्रिय है।
जबकि वास्तविकता यह है कि—

  • इसी पोर्टल पर 171 शिकायतें दर्ज की गईं
  • शिकायतें कार्यस्थल पर भेदभाव, जबरन श्रम एवं प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संबंधित थीं
  • किसी भी शिकायत पर न जवाब मिला, न निवारण
  • बाद में पूरा पोर्टल ही बंद/ब्लॉक कर दिया गया

इसके बावजूद BRSR में उसी पोर्टल को “सक्रिय व्यवस्था” बताना सीधा-सीधा धोखाधड़ीपूर्ण प्रकटीकरण है।

मुद्दा 2 : भ्रष्टाचार मामलों को छिपाया गया

वेदांता ने BRSR में यह घोषित किया कि कंपनी या उसकी सहायक इकाइयों में—

  • किसी कर्मचारी/श्रमिक के विरुद्ध भ्रष्टाचार या रिश्वत के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई (Nil)

जबकि तथ्य यह हैं कि— वेदांता की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी BALCO के स्थायी कर्मचारियों के विरुद्ध—

  • IPC 420, 468, 471, 120-B जैसी गंभीर धाराओं में तीन FIR दर्ज हैं
  • आरोपी कर्मचारी महीनों तक फरार रहे
  • प्रबंधन ने पुलिस को भ्रामक जानकारी दी
  • कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई
  • जमानत के बाद आरोपियों को पूरा वेतन, बोनस और PF लाभ दिए गए

इन मामलों को “Nil” दिखाना जानबूझकर किया गया भ्रष्टाचार का दमन है।

मुद्दा 3 : मानवाधिकार शिकायतों के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा

BRSR में वेदांता ने यह दर्शाया कि—

  • कार्यस्थल पर भेदभाव : 0 शिकायत
  • जबरन/अनैच्छिक श्रम : 0 शिकायत

जबकि सच्चाई यह है कि—

  • 171 शिकायतें दर्ज की गईं
  • सभी को सिस्टम द्वारा Acknowledgement और Unique Reference Number मिले
  • बाद में पोर्टल बंद कर साक्ष्य दबाने का प्रयास किया गया

यह मानवाधिकार उल्लंघन, ESG धोखाधड़ी और निवेशकों को गुमराह करने का गंभीर उदाहरण है।

SEBI से स्पष्ट मांग

पूर्व मंत्री ने SEBI से मांग की है कि—

  1. वेदांता की BRSR FY 2024–25 की फॉरेंसिक जांच कराई जाए
  2. कंपनी को संशोधित और सत्य BRSR पुनः दाखिल करने का आदेश दिया जाए
  3. SEBI Act एवं LODR Regulations के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए
  4. कंपनी के Compliance Officer, Board of Directors और Assurance Provider की भूमिका की जांच हो
  5. निवेशकों और बाजार की निष्पक्षता की रक्षा के लिए कठोर आदेश पारित किए जाएं

सिर्फ कॉर्पोरेट अनुपालन नहीं, साख का प्रश्न

यह मामला केवल एक कंपनी की रिपोर्टिंग का नहीं, बल्कि निवेशक संरक्षण, मानवाधिकार, ESG की विश्वसनीयता और भारतीय पूंजी बाजार की साख से जुड़ा हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SEBI इस गंभीर धोखाधड़ी पर कितनी सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *