15 Dec 2025 कोरबा: भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO), कोरबा में एल्यूमिनियम उत्पादन के दौरान वायु प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के गंभीर, जानबूझकर और सतत उल्लंघन का मामला सामने आया है। मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला रिपोर्टों के अनुसार संयंत्र से निकलने वाला प्रदूषण अनुमेय मानकों से कई गुना अधिक है, जिससे कोरबा अंचल में रहने वाले नागरिकों, विशेषकर बच्चों, पशुधन, किसानों और पर्यावरण पर दीर्घकालिक व पीढ़ीगत खतरा उत्पन्न हो गया है। उपर्युक्त तथ्यों की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने पत्र लिखा है ।
श्री अग्रवाल ने पत्र में आगे लिखा है कि मान्यता प्राप्त Vimta Labs द्वारा BALCO की Potline–1 और Potline–2 से लिए गए नमूनों की रिपोर्टें स्थिति की गंभीरता को उजागर करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर (PM) का स्तर 50 mg/Nm³ की अनुमेय सीमा के मुकाबले 1400 से 1700 mg/Nm³ तक पाया गया, यानी मानक से 27 से 33 गुना अधिक। इसी प्रकार पार्टिकुलेट फ्लोराइड की अनुमेय सीमा 0.65 mg/Nm³ के विरुद्ध 8 से 13 mg/Nm³ दर्ज की गई, जो 11 से 19 गुना अधिक है।
सबसे अधिक चिंता का विषय गैसीय फ्लोराइड (हाइड्रोजन फ्लोराइड – HF) है। इसकी अनुमेय सीमा 25 mg/Nm³ निर्धारित है, जबकि Potline–1 में इसका स्तर 96–119 mg/Nm³ और Potline–2 में 137–187 mg/Nm³ तक पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार HF गैस वातावरण में निकलने के बाद वायुमंडलीय नमी से अभिक्रिया कर फ्लोराइड आयनों में बदल जाती है, जो मिट्टी, जलस्रोतों, फसलों, पशुधन और मानव अस्थि-तंत्र में जमा होकर दशकों से लेकर सैकड़ों वर्षों तक बनी रह सकती है।
स्थानीय नागरिकों और चिकित्सकीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का फ्लोराइड प्रदूषण दंत व अस्थि फ्लोरोसिस, आँख–नाक–गला–फेफड़ों में जलन, श्वसन रोग, पशुधन की मृत्यु, दूध उत्पादन में गिरावट तथा फसलों के झुलसने जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न करता है। मिट्टी और भूजल में जमा फ्लोराइड भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट का संकेत है।
उनहोंने आगे कहा है कि चिंता की बात यह है कि जब मौजूदा संयंत्र ही प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रहा, तब भी BALCO की विस्तार परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में कंपनी की उत्पादन क्षमता लगभग 5.70 लाख टन प्रति वर्ष है, जबकि विस्तार परियोजना के तहत इसे 3.70 लाख टन प्रति वर्ष और बढ़ाया जाना प्रस्तावित है। तीनों पॉट लाइनों के पूर्ण संचालन की स्थिति में कोरबा क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कितना भयावह होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।
हाल ही में एल्यूमिनियम फ्लोराइड की खपत सीमा 20 किग्रा/टन निर्धारित किए जाने की अधिसूचना जारी की गई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यह सीमा खपत से संबंधित है, उत्सर्जन से नहीं। उत्सर्जन मानक आज भी स्वतंत्र, बाध्यकारी और अपरिवर्तित हैं। ऐसे में इस अधिसूचना की आड़ में अत्यधिक उत्सर्जन को वैध ठहराने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
जयसिंह अग्रवाल ने पत्र में इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि भारत सरकार आज भी BALCO में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। इसके बावजूद यदि प्रदूषण नियंत्रण और निगरानी में शिथिलता बरती जा रही है, तो यह एक गंभीर नियामकीय विफलता को दर्शाता है। पूर्व में तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट कॉपर संयंत्र का उदाहरण बताता है कि पर्यावरणीय लापरवाही किस प्रकार सामाजिक असंतोष और जनहानि का कारण बन सकती है।
कोरबा के नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि BALCO के प्रदूषणकारी पॉट लाइनों का तत्काल संचालन रोका जाए, किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से तकनीकी और स्वास्थ्य-आधारित जांच कराई जाए, तथा दोषी कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही प्रभावित नागरिकों, किसानों और पशुपालकों को उचित मुआवज़ा देने और विस्तार परियोजना की स्वीकृति पर रोक लगाने की मांग भी उठ रही है।
यह मामला केवल एक औद्योगिक इकाई का नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण में जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। यदि समय रहते निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दुष्परिणाम कोरबा और आसपास के क्षेत्रों को लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।
