बालको द्वारा माननीय NGT के आदेश की खुली अवहेलना : Red Category उद्योग द्वारा अधिकरण को गुमराह कर CTE/CTO प्राप्त किया गया  – जयसिंह अग्रवाल

05 Jan 2025 कोरबा:  माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली के आदेश दिनांक 14.11.2022 की जानबूझकर, सचेत एवं दुर्भावनापूर्ण अवहेलना का एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि BALCO द्वारा माननीय अधिकरण के समक्ष असत्य एवं भ्रामक घोषणा प्रस्तुत कर, आवश्यक वैधानिक अनुमतियों के अभाव में ही Consent to Establish (CTE) एवं Consent to Operate (CTO) प्राप्त किए गए। उक्त आरोप लगते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और एन.जी.टी. अध्यक्ष को पत्र लिखा है ।

माननीय NGT के आदेश के अनुच्छेद‑20 में स्पष्ट निर्देश है कि Town & Country Planning विभाग तथा नगर पालिक निगम की पूर्व अनुमति के बिना CTE/CTO जारी नहीं किए जा सकते। तथापि, अभिलेखीय तथ्यों के अनुसार—

• नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति : 24.11.2023
• नगर पालिक निगम, कोरबा की भवन अनुमति : 13.02.2024

स्पष्ट है कि ये दोनों अनुमतियाँ NGT के आदेश की तिथि (14.11.2022) के काफी बाद प्राप्त की गईं। इसके बावजूद, अधिकरण के समक्ष यह दर्शाया गया कि सभी आवश्यक अनुमतियाँ पूर्व से उपलब्ध हैं।

जयसिंह अग्रवाल ने इस बात पर जोर देते हुए विशेष रूप से उल्लेखित किया  है कि Aluminium Smelter / Aluminium Processing उद्योग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानदंडों के अनुसार Red Category (अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग) में आता है, जिसका Pollution Index (PI) 96.6 से 99.1 के बीच है। ऐसे उद्योगों के लिए भूमि‑उपयोग एवं भवन संबंधी पूर्व स्वीकृतियाँ मात्र औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा की मूलभूत शर्त होती हैं।

विधि विशेषज्ञों के अनुसार, महत्वपूर्ण तथ्यों का दमन एवं असत्य घोषणा कर आदेश प्राप्त करना Fraud on Tribunal की श्रेणी में आता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय (S.P. Chengalvaraya Naidu बनाम Jagannath, A.V. Papayya Sastry बनाम Govt. of A.P.) यह स्थापित करते हैं कि धोखाधड़ी से प्राप्त कोई भी आदेश शून्य (Nullity) होता है।

इस प्रकरण में यह भी आरोप है कि माननीय NGT के आदेश की जानबूझकर अवहेलना कर Wilful Disobedience amounting to Contempt किया गया है, जो अधिकरण की गरिमा एवं पर्यावरणीय शासन के लिए गंभीर चुनौती है।

मामले में पूर्व मंत्री द्वारा यह मांग की गई है कि BALCO को जारी किए गए CTE/CTO को प्रारंभ से ही शून्य घोषित किया जाए, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो तथा पर्यावरणीय कानूनों की अवहेलना के लिए कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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