12 Jan 2025 कोरबा: केंद्र की भाजपा सरकार ने सुधार के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और गरीब मजदूरों से उनके काम के अधिकार को छीनने की जानबूझकर की गई कोशिश है।
उक्त बातें नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने रविवार को गांधी चौक, कोरबा में आयोजित मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत सामूहिक उपवास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
डॉ. महंत ने कहा कि अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले अधिकारों पर आधारित गारंटी थी, लेकिन नए फ्रेमवर्क के जरिए इसे एक कंडीशनल और केंद्र द्वारा नियंत्रित योजना में बदल दिया गया है, जिससे मजदूरों का वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मनरेगा का नाम और नियम बदले जाने के विरोध में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया है। इसके तहत 10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दूसरे चरण में रविवार को गांधी चौक, कोरबा से एक दिवसीय उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन करते हुए की गई। तत्पश्चात सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, जिसमें श्रमिक को काम मांगने का अधिकार प्राप्त था। बीते दो दशकों से यह योजना 12 करोड़ से अधिक मजदूरों के लिए जीवनरेखा रही है और कोविड महामारी के समय भी आर्थिक सुरक्षा के रूप में महत्वपूर्ण साबित हुई।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा रहा है। योजना में यदि कोई त्रुटि थी तो उसे सुधारा जा सकता था, लेकिन नाम और नियमों में बदलाव कर रोजगार के अधिकार को समाप्त करना उचित नहीं है।
पूर्व विधायक मोहित केरकेट्टा ने कहा कि भाजपा ने भगवान राम के नाम पर एक बार फिर जनता को गुमराह किया है। तथाकथित वीबीजी राम जी योजना में भगवान राम का कोई उल्लेख नहीं है, बल्कि इसका पूरा नाम विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण है।
पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2005 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लागू मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून था, जो प्रत्येक ग्रामीण को वैधानिक मजदूरी का अधिकार देता था। अब नियमों में परिवर्तन कर इस अधिकार को समाप्त किया जा रहा है।
जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिनिधि हरीश परसाई ने कहा कि मनरेगा कानून के तहत 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना या बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य था, जो इसकी मूल गारंटी थी। वर्तमान बदलावों से इसी गारंटी को कमजोर किया जा रहा है।
पूर्व जिला अध्यक्ष एवं पूर्व सभापति श्याम सुंदर सोनी ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़ रही है, जिसने पलायन को रोका और ग्रामीण मजदूरी को मजबूत किया।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने कहा कि ग्रामीण आजीविकाओं पर इस गंभीर हमले के विरोध में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन शुरू किया है, ताकि मनरेगा को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके।
ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चौहान ने कहा कि मनरेगा के स्थान पर लाया जा रहा नया अधिनियम काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है तथा राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है। फसल के समय रोजगार नहीं देना ग्रामीण संकट को और गहरा करेगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना ग्राम स्वराज की अवधारणा पर आघात है।
कार्यक्रम में श्रीमती कुसुम द्विवेदी, श्रीमती सपना चौहान, गजानंद साहु, मो. शाहिद, सुरेश सहगल, पुष्पा पात्रे, मनीष शर्मा, तनवीर अहमद सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन मनोज चौहान ने किया तथा आभार प्रदर्शन मुकेश राठौर ने किया।
